बाराबंकी (हैदरगढ़)। जनपद बाराबंकी के हैदरगढ़ क्षेत्र अंतर्गत कोलवा-सुबेहा मार्ग आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद यह कच्चा रास्ता वर्षों से जस का तस बना हुआ है। बरसात शुरू होते ही यह मार्ग कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों की जिंदगी नरक बन जाती है।
कैमरे पर छलका ग्रामीण महिला का दर्द
कोलवा गांव की निवासी मंतीषा खातून ने कैमरे पर गांव की जमीनी हकीकत बयां करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनके निकाह को 5 साल बीत चुके हैं, लेकिन जब से वह इस गांव में आई हैं, इस रास्ते की सूरत रत्ती भर भी नहीं बदली है। हर बार चुनाव आते हैं, वादे होते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब कुछ जस का तस छोड़ दिया जाता है।
"निकाह को 5 साल हो गए, लेकिन कोलवा-सुबेहा का यह रास्ता आज भी कच्चा है। हल्की बारिश में भी यहां पैदल निकलना मुश्किल हो जाता है। कोई देखने वाला नहीं है।" — मंतीषा खातून (ग्रामीण)
स्कूल के बच्चों और मरीजों पर भारी मुसीबत
रास्ता कच्चा और बदहाल होने की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को होती है। आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस या चार पहिया वाहन गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाते, जिससे कई बार मरीजों को मुख्य सड़क तक चारपाई पर लादकर ले जाना पड़ता है।
कब जागेगा जिम्मेदार प्रशासन?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक कई बार पक्की सड़क बनवाने की गुहार लगाई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद क्या जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागेंगे या कोलवा गांव के लोग यूं ही कीचड़ भरी राहों पर चलने को मजबूर रहेंगे।
स्थान: कोलवा-सुबेहा, हैदरगढ़ (बाराबंकी)
कवरेज: ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्ट
